Sunday, July 1, 2018

Dil ka dard

Dil ka dard


{दुनिया बहुत मतलबी है :
साथ कोई क्यों देगा :
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता :
तो बिन गम प्यार कोन  देगा }
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{दर्द तो बहुत है दिल में :
पर दिख नहीं सकते :
करते है मुहब्बत तुमसे :
पर बता नहीं सकते }
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{आपसे दूर होकर हम जायेगे कहा :
आप जैसा दोस्त हम पाएंगे कहा :
दिल को कैसे संभाल लेगे :
पर आँखों के आंसू हम छुपायेंगे कहा }
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{सुन पगली तेरा दिल भी धड़केगा :
तेरी आँख भी फड़केगी :
अपनी ऐसी आदत डालूंगा :
के हर पल मुझ से मिलने के लिए तड़पेगी }
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{न तेरे आने की ख़ुशी :
न तेरे जाने का गम :
बीत गया वो जमाना :
जब तेरे दीवाने थे हम }
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पता नहीं चला कब वो दोस्त से प्यार बन गया 
साथ गुजरा हुआ कुछ पल आज यादगार बन गया 
कर न सके उनसे हम इज़हार हम इस बात का 
और देखते ही देखते वह किसी और के दिलदार बन गए 
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सरब पिता हु मई तो इसमें भला क्या बुराई है 
तना देने वालो मुझसे पूछो क्या गमे  जुदाई है 
प्यार हुआ है जबसे मई कही खो सा गया हु 
इश्क़ करने वालो उल्फत से अच्छी तन्हाई है 
दिल टुटा दर्द हुआ आस्क निकले खूब रोया पहले हाल दिल तन्हाई था 
अब दर्दे दिल तन्हाई है 
रिश्ते टूटे आस छूती अब क्यों जीऊ क्यों कमाऊ 
अब ऐसा को है सहर में जिससे मेरी आशनाई है
 जाम लगा होठ से तो दिल को सुकून मिला थोड़ा 
मैखाना ही अपना एक सखी है बाकी दुनिया हरजाई है 
दिल मेरा दर्द मेरा शाम मेरी जाम मेरा मर्जी मेरी 
ऐ  दुनिया तुझे भुलाने की यही महफ़ूज दवाई है 
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रुक जा सुबह तक इ रात आखिरी 
ज़िन्दगी से है ये मुलाकात आखिरी 
तुम मेरे जनाज़े को कन्धा जरूर देना 
कोन  जाने होगा  मेरा ये सफर तेरे साथ आखिरी 
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